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India: NREGA Sangharsh Morcha condemns the continuous harassment of Sanjay Sahni and other members of SPSS in Muzaffarpur

11 July

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10 July 2017

NREGA Sangharsh Morcha condemns the continuous harassment of Sanjay Sahni and other members of SPSS in Muzaffarpur

Members of Samaj Parivartan Shakti Sanghathan (SPSS) / MGNREGA Watch, a collective of about 10,000 rural workers of Muzaffarpur, Bihar have been facing continuous harassment at the hands of the local administration because of their fight against corruption in government programmes. So far the harassment has taken the form of threats, violence, false FIRs and under-payment of NREGA wages.

Seven false FIRs have been lodged against various members of the Sangathan. The charges include holding government officials captive, “maar-pitai”, confiscating government documents, creating obstacles in routine government work. In February 2017 an FIR was lodged against Sanjay Sahni, the founder of the Sangathan under The Scheduled Castes and Tribes (Prevention of Atrocities) Act. The most ludicrous FIR is the one filed on 31 March 2017 in which Sanjay Sahni has been accused of attempting to murder Shambhunath Singh, the Panchayat Rozgar Sewak of Ratnauli Gram Panchayat in Kurhani block. Sanjay Sahni was actually in Ranchi that day.

About 250 members of the Sangathan have been paid a mere Rs 72-108 a day for working on the NREGA scheme Gram Mahant Maniyari mein Bees Pokhar ka udai ka bhag 4 aur 5 in January – March 2017.It is worth noting that workers not associated with the Sangathan were paid the full NREGA wage of Rs 177 a day for the same work done by them in the same village at the same time.

When the Sangathan members learnt of the under-payment in June, they demanded a re-measurement of the work done by them. Soon after this, the Programme Officer of Kudhani got a different set of workers to start work on the disputed worksite, making re-measurement virtually impossible.

To protest against the injustice meted out to them, members of the Sangathan have been sitting on dharna in front of the Muzaffarpur Collectorate since 5 June 2017. On 3 July, a delegation of Sangathan members and friends of the Sangathan met the MGNREGA Commissioner and Secretary, Rural Development Department, Government of Bihar. Both the officials claimed that since the payment records have already been uploaded in the NREGA Management Information System, they will be unable to instruct payment to the remaining wages to the Sangathan members for the work done by them in January – March 2017.

The delegation had requested a neutral enquiry but a team comprising only of government officials and functionaries visited Mahant Maniyari on 5 July. This team did not speak with any member of the Sangathan.

The delegation also met Bihar’s Director General of Police (DGP) on 3 July regarding the bogus FIRs. The DGP assured the delegation that he will forward the matter to Muzaffarpur’s Deputy Inspector General of Police (DIG) but when the DIG was met with on 8 July, he was unaware of the bogus FIRs.

NREGA Sangharsh Morcha stands in solidarity with Samaj Parivartan Shakti Sangathan and strongly condemns the harassment of its members. It demands the following:

  • Withdrawal of all the bogus FIRs against members of Samaj Parivartan Shakti Sangathan and legal action against persons responsible for lodging these FIRs.
  • Payment of the full NREGA wage to workers of Samaj Parivartan Shakti Sangathan for the work done by them earlier this year, along with compensation for delayed payment.
  • A commitment from the political leadership and bureaucracy of Bihar of proactive action against any future victimization of people working to claim their legal entitlements.

In solidarity,

Arundhati Dhuru, Kamayani Swami and Ankita Aggarwal for NREGA Sangharsh Morcha

For further information, please contact Sanjay Sahni (9801232656) or write at nrega.sangharsh.morcha[at]gmail.com.

Annexure - Fact Finding Report: Slew of FIRs against Sanjay Sahni in Muzaffarpur, Bihar

10 जुलाई 2017

नरेगा संघर्ष मोर्चा मुज़फ़्फ़रपुर में संजय साहनी व समाज परिवर्तन

शक्ति संगठन के अन्य सदस्यों पर हो पर हो रहे उत्पीड़न की निंदा करता है

मुज़फ़्फ़रपुर (बिहार) के लगभग 10,000 ग्रामीण मज़दूरों के संगठन, समाज परिवर्तन शक्ति संगठन / मनरेगा वॉच के सदस्यों का भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष करने के कारण उनका स्थानीय प्रशासन द्वारा लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है. अभी तक उनको धमकियां मिली हैं, उनको हिंसा का सामना करना पड़ा है, उनपर झूठी प्राथमिकियां थोपी जा रही है और उनको कम नरेगा मज़दूरी दी जा रही है.

संगठन के सदस्यों के विरुद्ध अब तक सात झूठी प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं. इन प्राथ्मिकियों में सरकारी अधिकारियों को बंधी रखना, मार-पीट करना, सरकारी दस्तावेज़ जब्त करना, सरकारी काम में बाधा डालना शामिल हैं. फ़रवरी 2017 में संगठन के संस्थापक संजय साहनी पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई. 31 मार्च 2017 को संजय साहनी पर रतनौली के पंचायत रोज़गार सेवक शम्भुनाथ सिंह की हत्या करने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया, जबकि उस दिन संजय रांची में थे.

संगठन के लगभग 250 मज़दूरों को ग्राम महंत मनियारी में बीस पोखर का उड़ाई का भाग 4 और 5 नरेगा योजना में जनवरी से लेकर मार्च 2017 तक काम करने के लिए केवल 72 – 108 रुपये प्रति दिन के दर से मज़दूरी मिली. जबकि उन मज़दूरों को, जो संगठन से नहीं जुड़े हैं, उन्हें उस ही समय उस ही गाँव में काम करने के लिए 177 प्रति दिन की पूरी नरेगा मज़दूरी मिली.

जब संगठन के सदस्यों को कम मज़दूरी मिलने के बारे में जून में पता चला, उन्होंने उनके द्वारा किए गए काम की पुनः मापी करने की मांग रखी. इसके जल्द ही बाद कुढ़नी प्रखंड के कार्यक्रम पदाधिकारी ने कुछ अन्य मज़दूरों को इन योजनाओं पर काम करने के लिए लगा दिया, जिससे काम की पुनः सही नापी संभव न हो.

उनके साथ हो रहे अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाने के लिए 5 जून से संगठन के सदस्य मुज़फ्फ़रपुर के कलेक्ट्रेट के सामने धरने पर हैं. 3 जुलाई को संगठन के कुछ सदस्यों व साथियों का एक प्रतिनिधि-मंडल बिहार के मनरेगा आयुक्त व ग्रामीण विकास विभाग के सचिव से मिला. इन दोनों अधिकारियों ने कहाँ कि चूंकि मज़दूरों द्वारा किए गए काम का ब्यौरा नरेगा के मैनेजमेंट इन्फौर्मेशन सिस्टम (MIS) पर अपलोड हो गया है, उनको अब पूरी मज़दूरी देना संभव नहीं है.

प्रतिनिधि-मंडल ने इस मामले में एक निष्पक्ष दल द्वारा जांच की मांग की, परन्तु 5 जुलाई को महंत मनियारी में एक ऐसा जांच दल गया जिसने संगठन के सदस्यों से बात तक नहीं की. उस ही दिन प्रतिनिधि-मंडल ने फ़र्जी प्राथमिकियों के मामले में बिहार पुलिस महानिदेशक से मुलाक़ात की. पुलिस महानिदेशक ने आश्वासन दिया कि वे मुज़फ्फ़रपुर के पुलिस उपमहानिरीक्षक को इन मामलों के बारे में सूचित करेंगे, परन्तु 8 जुलाई तक पुलिस उपमहानिरीक्षक को इन प्राथमिकियों के बारे में पता नहीं था.

नरेगा संगर्ष मोर्चा समाज परिवर्तन शक्ति संगठन के साथ खड़ा है और निम्न मांगे करता है:

  • समाज परिवर्तन शक्ति संगठन के सदस्यों के विरुद्ध दर्ज की गई झूठी प्राथमिकियां वापस ली जाएं.
  • समाज परिवर्तन शक्ति संगठन के सदस्यों को उनके द्वारा जनवरी – मार्च 2017 में किए गए काम के लिए पूरी नरेगा मज़दूरी दी जाए और साथ में देरी से भुगतान के लिए मुआवज़ा भी.
  • बिहार का राजनैतिक नेतृत्व व नौकरशाही यह प्रतिबद्धता दे कि भविष्य में अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे लोगों का उत्पीड़न नहीं होगा.

अरुंधती धूरू, कामायनी स्वामी और अंकिता अग्रवाल, नरेगा संघर्ष मोर्चा की ओर से.

अधिक जानकारी के लिए संजय साहनी (9801232656) से संपर्क करें या nrega.sangharsh.morcha[at]gmail.com पर लिखें.

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Fact Finding Report: Slew of FIRs against Sanjay Sahni in Muzaffarpur, Bihar (June 2017)
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