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India: Several Thousand Sign the Appeal for Bail to 84-year Old Stan Swamy (March 30, 2021)

30 March

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More than 2500 people from across the country and world have issued the attached statement against the recent rejection of bail application of 84-year old Stan Swamy and appealed for his immediate bail. They have also appealed for repeal of UAPA, and a return to the norm where bail is the rule not the exception.

The signatories include several noted academics, activists, artists, film-makers, economists, jesuits, journalists, lawyers, retired bureaucrats and writers such as Admiral Laxminarayan Ramdas, Aloka Kujur, Alpa Shah, Anand Patwardhan, Anuradha Talwar, Apoorvanand, Aruna Roy, Ashish Kothari, Bela Bhatia, Bharat Bhushan Choudhary, Cedric Prakash, Dayamani Barla, Elina Horo, Farah Naqvi, Jayati Ghosh, Jean Dreze, John Dayal, Kavita Srivastava, Lalita Ramdas, Nandita Das, Nikhil Dey, Reetika Khera, Sridhar V, Sushanto Mukherji, Vasavi Kiro, Virginius Xaxa, Wajahat Habibullah, Yogendra Yadav and many more.

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30 March 2021

Appeal for Immediate Bail to 84-year Old Stan Swamy

We, the undersigned, are shocked by the rejection of a bail application filed by Stan Swamy in the Bhima Koregaon case by the special NIA (National Investigation Agency) court on 22 March 2021. He was arrested on 8 October 2020 and continues to languish in jail.

Eighty-four-year old Stan Swamy is a Parkinson’s disease patient with severe tremors in both hands. He has trouble drinking from a glass, taking bath and washing clothes on his own. He has other health ailments as well. Before his arrest, he used to spend most of his time at Bagaicha, Ranchi. Despite being repeatedly harassed (first by Maharashtra police and then the NIA) since 2018 in this case, he stayed in Bagaicha and cooperated fully with the investigation. Rejection of the bail of an elderly and ailing person, with limited mobility and no history of violence against others, is beyond comprehension.

We know Stan as an exceptionally gentle, honest and selfless person. We have the highest regard for him and his work. He has spent decades in Jharkhand working for the rights of the Adivasis and underprivileged.

It is ironic that while public support for Stan Swamy continues to grow, the court rejected the bail application in the “community’s interest”. Adivasis, Gram Sabhas, civil society, several political leaders and parties, and Jharkhand’s Chief Minister himself have condemned Stan’s arrest and expressed support and solidarity with him.

The recent Arsenal report, prepared on the basis of electronic evidence collected by the NIA, has exposed how fake documents were planted into the computers of the accused in the Bhima Koregaon case. Stan himself clearly told the NIA that some so-called extracts allegedly taken from his computer were fabricated and that he disowned them. It is disturbing that the court decided to ignore this evidence of fabrication as it rejected the bail application.

Stan Swamy is a symbol of the plight of thousands of undertrial prisoners who languish in jail for years under fabricated UAPA charges, often aimed at harassing those who stand up for the underprivileged or oppose the government. The conviction rate in UAPA cases is extremely low (2.2% between 2016-19 as mentioned in the Parliament), confirming that many of the charges are baseless.

We appeal for immediate bail for Stan Swamy, repeal of UAPA, and a return to the norm where bail is the rule not the exception.

In Solidarity

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30 मार्च 2021

84 वर्षीय स्टेन स्वामी की तत्काल बेल के लिए अपील

हम, विभिन्न जन संगठन व सामाजिक कार्यकर्ता, 22 मार्च 2021 को विशेष NIA अदालत द्वारा भीमा कोरेगांव मामले में स्टेन स्वामी की बेल के आवेदन को ख़ारिज करने के निर्णय से हैरान हैं. उन्हें 8 अक्टूबर 2020 को गिरफ्तार किया गया था और तब से वे जेल में हैं.

84 वर्षीय स्टेन स्वामी पार्किन्सन रोग के मरीज़ हैं एवं उनके दोनों हाथों में अत्यधिक कम्पन होता है. उन्हें ग्लास से तरल पदार्ध पीने में, नहाने में एवं कपड़े धोने में कठिनाई होती है. उन्हें अन्य स्वास्थ्य सम्बंधित समस्याएं भी हैं. उनकी गिरफ़्तारी से पहले, वे अपना अधिकांश समय बगईचा, रांची में ही गुजारते थे. हालाँकि 2018 से (पहले महाराष्ट्र पुलिस व बाद में NIA द्वारा) उन्हें लगातार भीमा कोरेगांव मामले में परेशान किया जा रहा था, लेकिन वे बगईचा में ही स्थायी रहे और उन्होंने जांच में पूर्ण सहयोग किया. एक ऐसे व्यक्ति, जो बुज़ुर्ग हैं, रोग ग्रसित हैं, ज़्यादा चलने-फिरने में सक्षम नहीं हैं एवं जिनका दूसरो के विरुद्ध हिंसा का कोई इतिहास नहीं है, इनकी बेल खारिज होना सोच से परे हैं.

हम स्टेन को विशेषकर एक सज्जन, ईमानदार और जन-हित में काम करने वाले इन्सान के रूप में जानते हैं. हमारे मन में उनके और उनके काम के लिए सर्वोच्च्च सम्मान है. वे दशकों से झारखंड में आदिवासियों व वंचितों के अधिकारों के लिए संघर्षत रहे हैं.

यह सोचने की बात है कि एक तरफ स्टेन स्वामी के लिए जन समर्थन लगातार बढ़ रहा है और दूसरी ओर न्यायालय ने उनके बेल आवेदन को “समुदाय के भले” के नाम पर ख़ारिज कर दिया है. बड़ी संख्या में आदिवासियों , ग्राम सभाओं, जन संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, राजनैतिक पार्टियाँ, नेताओं एवं झारखंड के मुख्यमंत्री ने भी स्टेन की गिरफ़्तारी की निंदा की हैं एवं उनके संघर्ष को समर्थन दिया हैं.

NIA द्वारा इकठ्ठा किए गए इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के आधार पर बनी आर्सेनल रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भीमा कोरेगांव मामले में आरोपित सामाजिक कार्यकर्ताओं के कंप्यूटर में फ़र्ज़ी दस्तावेज़ डाले गए थे. स्टेन ने खुद NIA द्वारा प्रस्तुत विभिन्न दस्तावेजों (जो तथाकथित रूप से उनके कंप्यूटर से पाए गए हैं) का पूर्ण खंडन किया था और कहा था कि ये दस्तावेज़ फ़र्ज़ी रूप से उनके कंप्यूटर में डाले गए है. यह चिंताजनक है कि न्यायालय ने बेल को ख़ारिज करने के दौरान इन बातों को दरकिनार किया.

स्टेन स्वामी उन हजारों विचारधीन कैदियों के प्रतीक हैं जो सालों से UAPA के फ़र्ज़ी आरोपों पर जेल में बंद हैं. वंचितों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वालों अथवा सरकार का विरोध करने वालों के विरुद्ध अक्सर UAPA को इस्तेमाल किया जाता है. यह सोचने की बात है कि UAPA मामलों में से नगण्य मामलों में ही दोष सिद्ध होता है (2016-19 में 2.2%, हाल में केंद्र सरकार द्वारा संसद में दिए जवाब के अनुसार). यह इंगित करता है कि UAPA के लगभग सभी मामले निराधार होते हैं.

हम अपील करते हैं कि स्टेन स्वामी को तत्काल बेल दी जाए, UAPA को रद्द किया जाए एवं न्याय व लोकतान्त्रिक मूल्यों पर आधारित व्यवस्था की पुनः स्थापना हो जिसमें बेल मिलना असामान्य बात न हो.

संघर्ष के समर्थन में.

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India: Citizens Appeal for Immediate Bail to 84-year Old Stan Swamy [with full list of sinatories] - March 30, 2021