बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद सूरत में हुए दंगों के दौरान सामूहिक बलात्कार को एक अस्त्र के रूप में विधिवत इस्तेमाल किया गया। पर इसमें एक नई बात थी और वह थी इन सामूहिक बलात्कारों के वीडियो टेप बनाना। यह कोई ऐसा मामला नहीं था कि किसी राह चलते ने इन बलात्कारों की फिल्म बना ली हो, बल्कि यह सब बहुत सुनियोजित तरीके से फ्लड लाइट का इस्तेमाल करके किया गया, बावजूद इसके कि उस दौरान आसपास के इलाकों की बिजली कटी हुई थी [1]। प्रफुल्ल बिदवई के अनुसार, 1992 के सूरत दंगों में स्त्रियों के खिलाफ़ हुई भयानक बर्बरता के पीछे मोदी की सोच काम कर रही थी [2]। इन दंगों की बाद की तस्वीरों में मोदी और आडवानी साथ साथ दिखाई पड़ते हैं[3]...।



