झारखंड में भुखमरी और कुपोषण
आज से ठीक एक साल पहले सिमडेगा की 11-वर्षीय संतोषी कुमारी अपनी माँ को भात-भात कहते-कहते भुखमरी की शिकार हो गयी थी. आधार से लिंक न होने के कारण उसके परिवार का राशन कार्ड रद्द कर दिया गया था. पिछले एक वर्ष में झारखंड में कम-से-कम 15 लोगों की भूख से मौत हो गयी है. इनमें से 6 आदिवासी, 4 दलित और 5 पिछड़े समुदाय के थे. ये सभी मौतें पेंशन या जन वितरण प्रणाली से राशन न मिलने के कारण हुई हैं.
इनमें से 5 परिवारों का राशन कार्ड नहीं बना था एवं 5 परिवार आधार-आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन व्यवस्था की समस्यों के कारण अपने राशन से वंचित थें. साथ ही, 6 व्यक्ति अपने सामाजिक सुरक्षा पेंशन से वंचित थे. 10 मौंतों में साफ़ तौर पर आधार-सम्बंधित विफलताओं का भूख में योगदान था.
भूख से मौतें केवल झारखंड तक ही सिमित नहीं है. पिछले चार सालों में देश भर में भूख से 56 मौतें हुई हैं. भुखमरी और कुपोषण की समस्या केवल इन परिवारों तक सीमित नहीं है. झारखंड की बड़ी प्रतिशत जनसँख्या को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता. 40 प्रतिशत से भी अधिक पांच वर्ष से कम आयु के बच्चें कुपोषित हैं.
झारखंड सरकार ने लगातार भूख से हों रही मौतों को रोकने के लिए किसी प्रकार की कार्यवाई नहीं की है. न रद्द किए गए राशन कार्ड पुनः बनाए गए हैं, न जन वितरण प्रणाली से आधार-आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन की व्यवस्था बंद की गयी, न छूटे परिवारों का राशन कार्ड बनाया गया और न ही जन कल्याणकारी योजनाओं से आधार का जुड़ाव ख़तम किया गया.
झारखंड में भुखमरी और कुपोषण को समाप्त करने के लिए भोजन का अधिकार अभियान निम्न मांगे करती है:
· सभी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में आधार का जुड़ाव समाप्त हो व बायोमेट्रिक सत्यापन की अनिवार्यता समाप्त हो.
· आधार से नहीं लिंक होने के कारण जिन परिवारों के राशन कार्ड रद्द हुए हैं व जिन्हें पेंशन सूचि से हटाया गया है, उनकी सूची कार्ड/पेंशन रद्द होने के कारण के साथ तुरंत सार्वजनिक की जाए एवं उनका कार्ड/पेंशन तुरंत वापिस जारी किया जाए.
· जन वितरण प्रणाली को ग्रामीण क्षेत्र में सार्वभौमिक किया जाए एवं सभी आदिम जनजाति परिवारों व एकल महिलाओं को अन्त्योदय कार्ड दिया जाए.
· राशन वितरण से निजी डीलरों को हटाया जाए और ग्राम पंचायत/महिला संगठनों को राशन वितरण की ज़िम्मेवारी दी जाए.
· राज्य में पोषण की स्थिति में सुधार लाने के लिए जन वितरण प्रणाली में सस्ते दामों पर दाल व खाद्य तेल भी दिया जाए.
· प्रधान मंत्री मात्रु वंदना योजना की राशि 5,000 रुपये से बढ़ाकर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून में दिए गए अधिकार के अनुरूप 6,000 रुपये हो और सहयोग केवल पहले बच्चे तक ही सीमित न हो.
· सभी गर्भवती और धात्री महिलाओं को सप्ताह में 5 दिन अंडा दिया जाए.
· आंगनवाड़ी और मध्याह्न भोजन में बच्चों को सप्ताह में 5 दिन अंडा दिया जाए.
· राज्य के हर सुदूर टोले में आंगनवाड़ी स्थापित की जाए, सभी आंगनवाड़ियों में बच्चों के पढने की व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए एवं सभी बच्चों को रेडी-टू-ईट (पैकेट बंद खाद्य सामग्री) के बजाए गरम खाना दिया जाए.
· राज्य के सभी वृद्ध, विधवा और विकलांग लोगों को 2000 रुपये प्रति माह की सामाजिक सुरक्षा पेंशन ससमय दी जाए.
· झारखंड के मनरेगा मज़दूरी दर को बढ़ाकर कम-से-कम राज्य के न्यूनतम मज़दूरी दर के समान किया जाए.
· मनरेगा में सभी परिवारों को सालाना 200 दिन काम का अधिकार दिया जाए.
· मनरेगा मज़दूरी भुगतान किसी भी परिस्थिति में 15 दिनों के अन्दर मज़दूरो के खाते में सुनिश्चित किया जाए.
भोजन का अधिकार अभियान, झारखण्ड |